Bacchon ki kahani. Hindi kahani.

 

Bacchon ki kahani. Hindi kahani.

Bacchon ki kahani. Hindi kahani.


नन्हा थॉमस खेतों में दौड़ लगाते - लगाते बाड़े की तरफ निकल गया । बाड़े में भेड़ - बकरियां घूम रही थीं । एक कोने में मुर्गीघर बना था । कुछ मुर्गियां इधर - उधर घूम रही थीं , लेकिन कुछ एक जगह जमकर बैठी थीं । अरे ! यह तो हिलती हीं नहीं , पर क्यों ? नन्हे थॉमस के मन में प्रश्न उठा मैं भी इन्हें जरूर उड़ाऊंगा । थॉमस यह सोचकर ज्यों हीं आगे बढ़ा कि बड़ी बहन ने आवाज लगाई रुको ! इन्हें परेशान मत करो ... चलो अंदर चलकर खाना खाओ । मैं कब से तुम्हें बुला रही हूं ... पर यह हिलती क्यों नहीं ? 


थॉमस ने जिज्ञासा से पूछा अरे ! वो अपने अंडों के ऊपर बैठी है । इसके अंडों से चूजे निकलेंगे , फिर तुम उनसे खेलना । अभी भीतर चलो । बड़ी बहन ने प्यार से समझाया । थॉमस ने मुंह बनाया और बहन के पीछे - पीछे चल दिया । खाना खाकर सब आराम करने लगे , तब थॉमस नजर बचाकर बाहर निकल आया । वह चुपके से मुर्गियों के पास पहुंचा । मुर्गियों को अंडों पर बैठे देखकर वह बोला- तुम अभी तक यहीं बैठी हो ? जाओ तुम खेलो ... लो तब तक मैं तुम्हारे अंडों के ऊपर बैठ जाता हूं ।


 थॉमस लपककर अंडों पर बैठ गया । पचाक- पचाक अंडे टूट गए । अब थॉमस की आंखों से आंसू बहने लगे । यह क्या हुआ ? अब चूजे कहां से निकलेंगे ? वह रोते - रोते घर के भीतर गया । थॉमस के रोने का कारण जानकर सब हंसने लगे और उसे मां ने समझाया कि अंडों पर मुर्गी के बैठने से ही चूजे निकलते हैं । मुर्गी फिर अंडे देगी । मां की बात सुनकर थॉमस चुप हुआ , लेकिन उसके मन में अभी भी कई प्रश्न थे!


 बचपन से छोटी - छोटी चीजों को देखने - परखने और ध्यान देने वाला यह बालक बड़ा होकर वैज्ञानिक बना । नाम है थॉमस अल्वा एडिसन । थॉमस अल्वा एडिसन एक महान वैज्ञानिक थे । इनका जन्म 11 फरवरी सन् 1847 को अमेरिका में हुआ था । जो बिजली के बल्ब के प्रकाश में हम अपने काम करते हैं , वह इन्हीं की देन है ।

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