जैसा करोगे वैसा पाओगे। Motivation kahani.

 

जैसा करोगे वैसा पाओगे। Motivation kahani.

जैसा करोगे वैसा पाओगे। Motivation kahani. किशान और घोड़े की कहानी। Hindi kahani. Motivational story.


एक किशान अपने खेत में पैदा हुए अनाज को बेचने के लिए घोड़े पर बैठ कर शहेर गया। यह घोड़ा बढ़ते उम्र के साथ थोड़ा कमजोर हो गया था, फिर भी वो वफादार होने से ज्यादा वजन सहन कर के मालिक को शहेर पहूंचाने के लिए तैयार था। घोड़ा थका हुआ होने के वावजूद भी वो अपने मालिक को लेके शहेर पहोंच गया। शहेर में किशान ने अच्छे भाव मे अनाज बेच के अच्छा पैसा कमाया। घोड़ा यह सब देख रहा था। घोड़े को खुशी हो रही थी कि उसके मालिक के पास बहोत पैसे आ गए है। किशान भी बहोत खुश था। 


पर यह सब खुशी में लालची किशान भूल गया था कि सुबह से उसके साथ आया हुआ घोड़े को उसने कुछ नहीं खिलाया। अनाज बेचने के बाद उसने एक होटल से खाना लाया और एक पेड़ के छांव के नीचे बैठ कर पेट भर के खाया। यह सब वह घोड़ा देख रहा था। आवाज कर के और सिर हिलाकर अपने मालिक को बताना चाह रहा था कि उसे भी भूख लगी है। किशान देखा और उसे कहा क्या भूख लगी है, कल ही तो खिलाया था। इतनी जल्दी भूख लग गई। आज कुछ नहीं है। यह सुनकर घोड़ा निराश हो गया। 


खाना खाने के बाद किशान अपने गांव जाने के लिए वहां से निकला। ज्यादा खा लेने के बाद वो घोड़े पर नहीं बैठा बल्कि चलते हुए गया। सुबह से घोड़े को खाना नहीं मिला था और धूप भी ज्यादा था। भूख और थक जाने के कारण उसका पैर फिसला ओर रॉड के पास वाले खड्डे में जाकर गिरा। खड्डे में गिरने के बाद घोड़े ने बाहर आने के लिए बहोत कोशिश की पर निकल नहीं पाया। 


किशान ने सोचा कि घोड़ा अब बृद्ध हो चुका है, अब यह कोई काम का नहीं, उसे बाहर निकाल के उसके पीछे भोजन का पैसा खर्च करना बेकार है। इस से अच्छा एक नया घोड़ा ले लेता हूं। इस घोड़े को यही दफन कर देता हूं। यह सोचकर किशान खड्डे में मिट्टी डालने लगा। समझदार घोड़ा समझ गया कि यह क्या कर रहा है, इस लिए किशान मिट्टी डालते गया और घोड़ा उस मिट्टी के जरिये बाहर निकल गया। घोड़े को बाहर आते देख किशान ढ़ोंग करने लगा। थोड़ी देर के लिए घोड़ा कुछ नही बोला इस लिए किशान उसके ऊपर चढ़ गया। और घोड़े को कहा चल भाई जल्दी घर चलते है। 


पर जैसे ही किशान घोड़े के ऊपर बैठा घोड़े ने जोर से झटका दिया और किशान को उसी खड्डे में गिरा दिया। खड्डे में गिरते ही उसके मुख से चीख निकल गई। क्योंकि किशान को बहोत चोट लगी थी। पर अब किशान को बाहर  निकालने वाला कोई नहीं था। घोड़ा भी अपने लालची मालिक को छोड़ के दूसरे मालिक की तलाश में निकल पड़ा। 


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