हम सभी का स्मार्टफोन पृथ्वी के लिए बहोत ही घातकी है।

हम सभी का स्मार्टफोन पृथ्वी के लिए बहोत ही घातकी है।

 

हम सभी का स्मार्टफोन पृथ्वी के लिए बहोत ही घातकी है। 

आज के जमाने मे मोबाइल फोन या स्मार्टफोन्स की वगैर की जिंदगी की कल्पना नहीं किया जा सकता। लोगों का छोटा बड़ा सभी काम मोबाइल पे ही हो रहा है। स्मार्टफोन लोगों कि जरूरियात के वजह एक सोख और स्टेटस बनता जा रहा है और वो जोखमी है। क्योंकि स्मार्टफोन पृथ्वी को धीरे धीरे खत्म करता जा रहा है। अब लोग बोलेंगे कैसे ? 


तो उसका जवाब यह रहा। आज पृथ्वी का तपमान लगातार बढ़ता जा रहा है। ध्रुवीय विस्तार का बर्फ पिघलता जा रहा है। समुद्र का पानी का स्तर बढ़ता जा रहा है। यह सब क्या है ? क्या पृथ्वी का तपमान ऐसे ही बढ़ रहा है ? पूरी दुनिया जानती है कि किसी भी चीज का प्रोडक्सन , पैकेजिंग, ट्रांसपोर्टेशन यह सब ग्लोबल वार्मिग बढाते है। स्मार्टफोन उपयोग करते वक्त कोई ऐसा होगा जो सोचता होगा कि इस स्मार्टफोन के पीछे हमारी पृथ्वी को कितना नुकसान हो रहा है। 


स्मार्टफोन के शौखिन लोग साल या दुसरे साल अपना स्मार्टफोन बदल देते है, सिर्फ यह सोचकर कि मेरा स्मार्टफोन पुराना हो गया है। मेकमास्टर यूनिवर्सिटी के एक रिसर्च के मुताबिक, आप जो 2 साल में अपना स्मार्टफोन का उपयोग कर के छोड़ देते हो उतने समय में उसे बनाने वाली कंपनी 85 से 95 % कार्बन उत्सर्जन करती है। 


टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री माटे सोने की खुदाई तेजी से हो रही है। इसके लिए जंगलों को काटा जा रहा है। पेड़ो की कमी से कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती जा रही है। आज चिली, अर्जेंटीना, बोलिविया में बड़ी मात्रा में पानी की खपत सर्जी है। क्योंकि वहां है अधिक मात्रा में लिथियम की खुदाई होती है। जो स्मार्टफोन की बैटरी बनाने में उपयोग आती है। 



 

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