फैमस है यहां का दशहरा।

 

फैमस है यहां का दशहरा

फैमस है यहां का दशहरा
वैसे तो भारत में हर गांव , हर शहर में अनेक स्थानों पर रावण दहन कर दशहरा मनाया जाता है , लेकिन कुछ स्थान ऐसे हैं , जो इस पर्व की भव्यता और आकर्षण के लिए प्रसिद्ध हैं । आइए जानें ऐसी ही कुछ जगहों के बारे में -

बस्तर का दशहरा- 
बस्तर पर्व का संबंध महाकाव्य रामायण के रावण वध से नहीं है , बल्कि इसका संबंध महिषासुर मर्दिनी मां दुर्गा से जुड़ा है । पौराणिक वर्णन के अनुसार अश्विन शुक्ल दशमी को मां दुर्गा ने अत्याचारी महिषासुर का वध किया था । यह पर्व 75 दिनों तक चलता है । पर्व की शुरुआत हरेली अमावस्या से होती है । हर साल दशहरे पर बड़ी संख्या में आसपास के गांवों से आदिवासी यहां पहुंचते हैं।

कुल्लू का दशहरा-
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में मनाए जाने वाले दशहरे की खासियत है कि जब पूरे देश में दशहरा खत्म हो जाता है , तब यहां शुरू होता है । सात दिनों तक चलने वाला यह उत्सव हिमाचल के लोगों की संस्कृति और धार्मिक आस्था का प्रतीक है । देश के बाकी हिस्सों की तरह यहां दशहरा रावण , मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन करके नहीं मनाया जाता । उत्सव के दौरान भगवान रघुनाथ जी की रथयात्रा निकाली जाती है । यहां के लोगों का मानना है कि इस अवसर पर देवतागण पृथ्वी पर आकर इसमें शामिल होते हैं।

मैसूर का दशहरा- 
कर्नाटक स्थित मैसूर दक्षिण भारत के ऐतिहासिक और अद्भुत पर्यटन स्थलों में गिना जाता है इसके अलावा यह प्राचीन शहर यहां मनाए जाने वाले दशहरे के लिए भी विश्वभर में प्रसिद्ध है । यह दस दिनों तक चलता है , जो नवरात्र के पहले दिन से ही शुरू हो जाता है । आखिरी दिन विजयादशमी का होता है , जो इस त्योहार का सबसे खास दिन होता है । धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस का वध किया था , जो बुराई पर अच्छाई का प्रतीक माना जाता है।

कोटा दशहरा - 
राजस्थान के अलग - अलग क्षेत्रों में कई त्योहार मनाए जाते हैं , इनमें कोटा का दशहरा काफी प्रसिद्ध है । दशहरे के दिन यहां एक भव्य मेले का आयोजन किया जाता है । मेले का प्रारम्भ नवरात्रि के प्रथम दिन से होता है । इस दौरान मेले में रामलीला का मंचन भी किया जाता है । दशहरे पर रावण , कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतलों का दहन किया जाता है । इसे देखने के लिए दूर - दूर से लोग कोटा पहुंचते हैं।

मडिकेरी दशहरा -
कर्नाटक के दक्षिण पश्चिम में एक जिला है कोडागु और कोडागु का जिला मुख्यालय है मडिकेरी। यहां का दशहरा बहुत मशहूर है। कहते हैं कि लगभग दो सौ साल पहले मडिकेरी में कोई महामारी फैली थी। तब यहां के राजा ने आदेश दिया था कि इससे छुटकारा पाने के लिए लोग मरियम्मन देवी की पूजा करें। यह पूजा अमावस्या के एक दिन बाद शुरू हुई और दशहरे के दिन खत्म। तब से इसकी परंपरा चल पड़ी। मरियम्मन देवी दक्षिण भारत के ग्रामीण इलाकों में देवी मां के रूप में पूजी जाती हैं , विशेषकर तमिलनाडु और कर्नाटक के कई हिस्सों में।


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