Pariyon ki kahani. Hindi kahani.

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 प्राची परीलोक की सबसे रहमदिल परी थी । धरती की सैर करने की बेहद शौकीन थी वहा धरती की हरियाली उसका मन मोह लेती थी । वह हमेशा कहती , ' धरती भी परीलोक से कम है क्या ? ' वह अकेले ही धरती पर चली जाती । वहां दिनभर रहती । जंगल के जानवरों और रंग - बिरंगे पक्षियों की क्रीड़ाओं का आनंद लेती और सांझ ढलने से पहले परीलोक लौट जाती। 


जंगल में बरगद का एक विशाल पेड़ था परी उसी पेड़ पर आ जाती । जंगल के जानवर उस पेड़ के नीचे इकट्ठे हो जाते और अचरज से परी को निहारते रहते । वे तरह - तरह की आवाजें करते तो परी को बहुत मजा आता । एक दिन परी को समय का ख्याल नहीं रहा । सांझ ढल गई और जंगल में अंधेरा उतर आया । तभी परी के पंख से उजली रोशनी छिटकने लगी । जानवरों के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा । पक्षी अपने घोंसलों से बाहर आ गए। वे इतने खुश हुए कि सुधबुध खोकर नाचने लगे। सुबह होते ही परी लौट गई। दिन बीतते रहे ।


 एक दिन परी ने महसूस किया कि जानवर अब उतनी संख्या में बरगद के नीचे नहीं आते हैं जंगल की हरियाली भी कम होने लगी थी उसने जंगल की सैर की तो देखा कई हरे - भरे पेड़ कटकर जमीन पर गिरे पड़े हैं वह घबराने लगी, अगर जंगल में हरियाली न हो और पशु - पक्षी कम हो जाएं तो वह यहां आकर क्या करेगी ? एक दिन तो ऐसा हुआ कि बरगद के नीचे एक भी जानवर नहीं आया। प्राची परी की आंखें डबडबा आईं। तभी कुछ मनुष्य हाथों में हथियार लिए बरगद के नीचे आकर लेट गए। परी उनके हथियार देखकर सारी बातें समझ गई। मगर करे तो क्या करे। वह मनुष्यों को समझाती कैसे ? उसे मनुष्यों की बोली कहां आती थी ? वह उदास हो गई। तभी उसकी आंखों से टपटप करके आंसू गिरने लगे। कुछ आंसू पत्ते पर लुढ़के तो कुछ नीचे मनुष्यों के हथियारों पर गिरने लगे। तभी एक आश्चर्य हुआ। हथियारों पर आंसू की बूंदें गिरी नहीं कि वे हथियार फूलों में बदल गए। 


मनुष्यों ने यह देखा तो वे डर गए। उनकी समझ में कुछ नहीं आया। वे सिर पर पैर रखकर भाग खड़े हुए। अगले दिन फिर कुछ दूसरे मनुष्य जानवरों को पकड़ने वाले जाल लेकर बरगद के नीचे आए । यह देखकर परी फिर रोने लगी। आंसू की बूंदें उन जालों पर पड़ी तो वे हरी पत्तियों में बदल गए। मनुष्य इस रहस्य को समझ नहीं पाए और जल्दी - जल्दी शहर लौट गए। अक्सर ऐसा ही होने लगा। मनुष्यों के हथियार और जाल कभी फूल तो कभी पत्तियों में बदल जाते। धीरे - धीरे यह बात मनुष्यों में पूरी तरह फैल गई। उन्होंने डरकर जंगल में आना ही छोड़ दिया। जंगल की हरियाली लौटने लगी। जानवरों की संख्या भी बढ़ने लगी। मनुष्यों को अब जंगल में न आता हुआ देखकर जानवरों का भय जाता रहा। वे बरगद के नीचे आने लगे। जंगल की रौनक लौट आई। बरगद के नीचे फिर से चहल पहल रहने लगी। मगर उन जानवरों और पक्षियों को क्या मालूम कि वे परी के आंसू ही थे, जिन्होंने जंगल को खत्म होने से बचाया था।


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