कभी हार मत मानो। Kabhi har mat mano. Powerful motivation story.

कभी हार मत मानो। Kabhi har mat mano.

कभी हार मत मानो। Kabhi har mat mano. Motivational stories in hindi. Powerful motivational story. 

निशा एक होनहार छात्रा  होने  के साथ ही एक बहुत ही अच्छी फुटबॉल ख़िलाड़ी भी थी। वह बहुत आशावादी लड़की  थी। वह हमेशा दूसरो की मदद किया करती थी और सबको जीवन के संघर्ष के प्रति  सकारात्मक-सोच रखने के लिए प्रेरित करती रहती। उसको यह गुण अपने पिता जी से मिले थी। जो हमेशा उसको सकारात्मक-सोच का महत्व समझाते रहते थे। वह बचपन से ही अंतराष्ट्रीय फुटबॉल ख़िलाड़ी बनने का सपना देखा करती थी। उसका यह सपना अब पूरा भी होने कि राह  पर था।  उसने  कॉलेज के फुटबॉल का  टूर्नामेंट जीता और अब उसे राष्ट्रीय स्तर पर फुटबॉल टूर्नामेंट खेलना था। निशा बहुत खुश थी वह बहुत मेहनत से राष्ट्रीय स्तर पर फुटबॉल टूर्नामेंट की तैयारी कर रही थी। माता पिता की दुलारी होने के साथ-साथ निशा अपने दोस्तों और अध्यापिकाओं की भी चहेती थी। हर कोई उससे बहुत प्यार करता और उसके सफल होने की कामना करता था। 

Motivational hindi story


एक दिन निशा अपनी सहेलियो के साथ कॉलेज से वापस घर लौट रही थी। रास्ते में उसने देखा  सड़क पर एक छोटा बच्चा अकेला खड़ा रो रहा  है, और सामने  से एक गाड़ी बहुत तेजी से आ रही हैं। वह जोर  से  चिल्लाई और बच्चे को बचाने के लिए उसकी ओर दौड़ी।  उसने बच्चे को जोर से पीछे की ओर धक्का  दिया पर बच्चे को बचाने के चक्कर में खुद गाड़ी के नीचे आ गयी। इतने में बच्चे के माँ बाप दौड़ कर आये उन्होंने तुरंत निशा के  माता-पिता को इसके बारे में सूचित किया और लोगो की मदद से उसको हॉस्पिटल में भर्ती करवाया। निशा बुरी तरह जख्मी हो चुकी थी। डॉक्टर ने तुरंत उसके ऑपरेशन की सलाह दी। निशा के माता-पिता ने ऑपरेशन के लिए हामी भर दी। बारह घंटे बेहोश रहने के बाद निशा को  होश आया। 


होश में आते ही निशा ने देखा  माँ एक कोने में कुर्सी पर बैठी रो रही है और पिता जी निशा के सिरहाने बैठे है। उठने का प्रयास करते हुए निशा बोली रो मत "माँ" मैं ठीक हूँ। पर जैसे ही निशा ने उठने की कोशिश की उसके सर पर आसमान टूट पड़ा, वह जोर से चीख पड़ी। उसका एक पैर काट दिया गया था। निशा को पल भर में ही सब कुछ वीरान लगने लगा, उसके आँखो से आंसू की लम्बी लम्बी आँसू की  धराये बहने लगी। उसके सारे सपने पल भर में टूट गए।  वह पिता जी से चिपक कर फफ़क कर रो पड़ी "पिताजी ""मेरा जीवन बर्बाद हो गया अब मैं कभी फुटबॉल नहीं खेल पाऊँगी"। पिता जी ने निशा के सर पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहा " बेटा " निराश मत हो, जीवन अनमोल है तुम  जीवित हो, ये भी उपरवाले की ही  कृपा है।  वह आगे बोले, भगवान जब एक रास्ता बंद कर देता है तो दूसरा रास्ता जरूर खोल देता है। जो रास्ते हमारे लिए बंद हो चुके है उनके बारे में सोचने से दुःख के सिवा कुछ नहीं मिलता। तुम अंतराष्ट्रीय फुटबॉल ख़िलाड़ी नहीं बन सकती इसका मतलब ये नहीं की अब तुम कुछ नहीं कर सकती।तुम  तो  मेरी बहादुर बेटी हो न , तुम अब और मेहनत से पढ़ाई करना और डॉक्टर बनना। निशा कुछ न बोली वह पिता जी से चिपक कर रोती रही और पिता जी उसे समझाते रहे। निशा अब ठीक हो कर घर आ गयी थी पर वो पहले जैसी निशा न रही हर समय गुमसुम रहती किसी से कुछ न कहती।  


वक़्त बीता, माँ  के स्नेह और पिता जी  की प्रेरणादायक  बातो से निशा के मन के जख्म भी भरने लगे। उसने मन में ठान लिया की वह  हार नहीं मानेगी  और जीवन में एक मुकाम हासिल करेगी। उसने अब सब कुछ छोड़ कर पूरा ध्यान पढ़ाई में लगा दिया। निशा की मेहनत रंग लायी और वह  कॉलेज में अव्वल आयी।  उसका मनोबल अब बहुत मजबूत हो गया था। उसने मेडिकल के  प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की और कुछ वर्षो में वह डॉक्टर बन गयी। 

उसके माता पिता उसकी इस सफलता से बहुत खुश थे , उन्हें अपनी लड़की पर गर्व था। परन्तु अब भी निशा का फुटबॉल के प्रति प्रेम कम नहीं हुआ था। उसने अपनी डॉक्टरी की कमाई से फुटबॉल खिलाड़ियो के लिए एक स्टेडियम  खोला जहाँ  फुटबॉल खिलाड़ियो को मुफ्त शिक्षा दी जाती। निशा नए फुटबॉल खिलाड़ियो को फुटबॉल खेलने की बारीकियां बताती और उन्हें खेलता  देख बहुत खुश होती। वह अब सभी के लिए एक प्रेरणा बन गई थी। जो की उसकी जीवन के प्रति  सकारात्मक-सोच से ही संभव हो पाया था। 


इसी तरह हमारे जीवन मे भी अगर ऐसा कोई हादसा हो तो उस से आप निराश मत बैठे। अगर भगवान एक रास्ता बंद करता है तो उसरा रास्ता जरूर खोलता है। पर वो हमें तय करना है। और थोड़ा कठिन भी हो सकता है। इस लिए कभी हार मत मानो।  


Author :- Sonia Misra


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