Best Inspirational Stories in Hindi – प्रेरक हिंदी कहानियां। प्रेरणादायक कहानी।

Best Inspirational Stories in Hindi

Best Inspirational Stories in Hindi – प्रेरक हिंदी कहानियां। प्रेरणादायक कहानी। Best story. Hindi kahani. Bacchon ki kahani.

Story - 1

 गोलू यूं तो बहुत समझदार लड़का था, लेकिन भूलने की आदत के कारण वो पूरी कक्षा में हसीं पात्र बना रहता था । हर कोई उसे भुलक्कड़ नाम से पुकारा करता था एक दिन हिंदी के शिक्षक ने सभी को कुछ सवालों के उत्तर याद करके आने को कहा। गोलू ने सब कुछ याद कर लिया। दूसरे दिन जब अपनी बारी पर गोलू से सवाल पूछे गए तो बेचारा हमेशा की तरह सिर खुजाता रह गया। शिक्षक ने उसे सजा दी और उसके दोस्तों ने भी उसका खूब मजाक उड़ाया। गोलू को उस दिन बहुत बुरा लगा।

 छुट्टी होने के बाद वह गांव से थोड़ी दूर एक नदी के किनारे जाकर बैठ गया। वह आज कुछ ज्यादा ही दुखी था। उसी समय एक ऋषि वहां से गुजर रहे थे।  नदी देखी तो प्यास बुझाने किनारे आ पहुंचे। उन्होंने देखा एकांत में कोई लड़का बैठा है।  वे गोलू के पास पहुंचकर बोले-  बेटा ! तुम यहां अकेले क्या कर रहे हो ?  गोलूने देखा पीले वस्त्रों में हाथ में कमंडल लिए  कांधे पर थैला, लंबी सफेद दाढ़ी में एक बुजुर्ग उसके सामने खड़ा है। गोलू अपने गालों पर हाथ फेरते हुए बोला, कुछ नहीं  ऋषि ने उसके आंसू देख लिए थे। वह आश्चर्य से बोले! अरे तुम तो रो रहे हो ! वह खामोश रहा।  वे फिर बोले! कोई समस्या है ? मुझे बताओ बेटा!  शायद मैं कोई सहायता कर सकू।

Bacchon ki kahani.

गोलू ने कहा ! मैं बहुत भुलक्कड़ हूं , मुझे कुछ याद नहीं रहता। जो भी पढ़ता हूं , सब भूल जाता हूं। मुझे भूलने की आदत है, इसीलिए सब मेरा मजाक भी बनाते हैं,  ऋषि जरा मुस्कराए और कहा!  अच्छा तो यह बात है।  मैं तुम्हारी सहायता कर सकता हू!

कैसे,  गोलू ने चमकती आंखों से पूछा। ऋषि ने अपने थैले में हाथ डाला और एक कागज की पुड़िया निकालकर दी। कहा यह बुद्धि तेज करने की औषधि है। रोज एक चुटकी इसका सेवन करने से तुम्हारी बुद्धि कुशाग्र हो जाएगी।  फिर तुम कुछ नहीं भूलोगे और हमेशा कक्षा में अव्वल आओगे। गोलू प्रसन्न हो गया और उसे लेकर चला गया। कुछ महीनों में तो जैसे चमत्कार हो गया। उसका जीवन बदल गया। उसे सबकुछ याद रहने लगा। उसके मित्र व शिक्षक आश्चर्यचकित थे। धीरे धीरे वह कक्षा में प्रथम आने लगा। उसकी छवि बिल्कुल विपरीत हो गई थी। 


एक दिन उसे अचानक रास्ते में फिर वही ऋषि मिले। उन्हें देखकर वह फूला नहीं समाया। उसने उनके चरण पकड़ लिए और कहने लगा!  गुरुदेव चमत्कार हो गया। आपने तो मेरा जीवन ही बदल दिया। उन्होंने अनजान बनते हुए कहा,  अरे ऐसा क्या कर दिया मैंने। आपने जो औषधि दी थी उससे मेरी बुद्धि सचमुच तेज हो गई। मुझे सब याद रहने लगा।  वे हंसने लगे। गोलू चकित होकर उन्हें देखने लगा। ऋषि बोले वो कोई औषधि नहीं थी। वो तो मात्र शक्कर का चूर्ण था और तुम्हें भी कोई भूलने की बीमारी नहीं थी, बस तुम्हें यह लगता था कि तुम भुलक्कड़ हो, इसीलिए तुम जो पढ़ते वो भूल जाते थे। तुमने उस चूर्ण को औषधि समझकर खाया और विश्वास कर लिया कि इससे तुम अव्वल आने लगोगे। यह मेरा नहीं, बल्कि तुम्हारे विश्वास का चमत्कार है।  गोलू आश्चर्यचकित रह गया। ऋषि उसकी पीठ थपथपाते हुए चले गए। वह उन्हें जाते देखता रहा।




Best Inspirational Stories in Hindi – प्रेरक हिंदी कहानियां।
Story - 2

हवा चलते  चलते थक गई थी।  उसका मन हो रहा था कहीं बैठकर आराम कर ले। शाम का समय था। काम से फुरसत पाकर लोग आराम कर रहे थे। एक जगह बालकनी में नन्हा बच्चा झूले में सोया हुआ था। उसकी मां बगल में बैठी आराम से चाय पी रही थी। वहीं दूसरी जगह ऑफिस से लौटा एक अफसर अपने लॉन में आराम कुर्सी पर पैर फैलाए बैठा था।  कहीं मजदूर हाथ - मुंह धोकर अपनी थकन उतार रहा था। एक मैं ही हूं , जो कभी आराम नहीं करती ,  हवा ने सोचा। वह पेड़ों के एक झुरमुट की ओर बढ़ चली। वहां सन्नाटा था और थोड़ी देर चैन से बैठा जा सकता था। पर उसका झोंका लगते ही पेड़ इधर उधर झुक गए।


हवा उनके बीच से लुढ़ककर उस पार जा गिरी। उफ ...यह तो बड़ी मुसीबत है ,  हवा ने सोचा। इस बार वह एक बगीचे की ओर गई। पतझड़ का मौसम था। बगीचे की जमीन सूखे पत्तों से ढंकी हुई थी। हवा खुश हो गई।  वाह , इन पत्तों के नरम  मुलायम गद्दे पर लेटना कितना मजेदार रहेगा। हवा लपककर पत्तों की ओर बढ़ी, लेकिन यह क्या ... ? पास पहुंचते ही पत्ते उछल - कूदकर दूर भागने लगे। हवा खीझ उठी। उसे लगा उसका समय भागदौड़ में ही निकल जाएगा। पास ही एक बड़ी  सी झील थी। उसका गहरा नीला पानी शांति से सोया हुआ था। अब यह पानी भागकर भला कहां जाएगा ?


 कुछ देर यहीं लेटकर आराम कर लेती हूं। यह सोचकर हवा झील के पानी की ओर लपकी, लेकिन पास पहुंचते ही झील का पानी हिलोरे मारने लगा। दो - चार थपेड़े खाकर हवा को वहां से भी भागना पड़ा। हवा उदास हो गई। वह चुपचाप एक ओर बढ़ने लगी। तभी उसने सड़क किनारे एक गुब्बारे वाले को खड़े देखा। हवा को एक उपाय सूझा। वह झटपट एक गुब्बारे में जा घुसी। उसे बड़ा मजा आया। अब यहां उसे परेशान करने वाला कोई नहीं था। तभी एक बच्चा आया और गुब्बारा खरीदकर चल दिया। थोड़ी देर तक तो हवा को अच्छा लगा , पर जल्दी ही उसे घुटन महसूस होने लगी। 

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वह बाहर कुछ देख भी नहीं पा रही थी। वह परेशान हो गई। उस दिन बच्चे का बर्थडे था।  उसने गुब्बारे को घर ले जाकर लटका दिया। वहां और भी बहुत से बच्चे आ गए। सब मिलकर हल्ला - गुल्ला करने लगे। वे गाने गा रहे थे और नाच भी रहे थे। पर अफसोस, हवा को कुछ भी नहीं दिख रहा था। कुछ समय बाद बच्चे ने केक काटा। सब एक सुर में  हैप्पी बर्थडे टूयू  गाने लगे। तभी एक शरारती बच्चे ने गुब्बारे को कसकर दबा दिया। गुब्बारा फूटा ...फटाक् .... तेज आवाज से हवा डर गई। पर अगले ही पल वह खुश हो उठी, क्योंकि वह गुब्बारे की कैद से आजाद हो गई थी। उफ हवा ने पसीना पोंछते हुए कहा, कैद होकर आराम करने से अच्छा है यूंही घूमती फिरूं। घूमना - फिरना क्या कम मजेदार है ? और वह सरसराती हुई आगे बढ़ चली।



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