मजेदार हिंदी कहानी। Bacchon ki kahani. Best story.

मजेदार हिंदी कहानी। Bacchon ki kahani. Best story.


मजेदार हिंदी कहानी। Bacchon ki kahani. Best story.


Kahani - 1

एक जंगल में एक तालाब था तालाब में बहुत सारे बड़े - बड़े कछुए रहते थे । एक बार एक मछुआरा वहां आया और कछुओं को जाल में पकड़कर एक बोरे में भरकर ले जाने लगा। रास्ते में जो भी जानवर मिलते , कछुए उनसे उन्हें बचाने का आग्रह करते , मगर किसी ने कछुओं को मछुआरे से बचाने की हिम्मत नहीं दिखाई।

अंत में एक हाथी को आते देख कछुओं ने हाथी से कहा- हाथी भैया , हाथी भैया रुको ... और हम सबको इस मछुआरे से बचा लो। यह हमें पकड़कर शहर में बेचने के लिए ले जा रहा है। इतना कहकर सारे कछुए बोरे में बने छेद से मुंह निकालकर रोने लगे। 

कछुओं को रोते देख हाथी ने तुरंत मछुआरे से कछुओं से भरा बोरा छीनते हुए कहा - तुम इन कछुओं को शहर नहीं ले जा सकते , तुम सीधे - से अपना रस्ता लो नहीं तो मैं तुम्हें पटक- पटककर मार डालूंगा। मछुआरा हाथी से डरकर घर की ओर भाग खड़ा हुआ। 

हाथी बोरे सहित सारे कछुओं को सूंड से उठाकर तालाब की ओर चल दिया। तालाब के किनारे पहुंचकर हाथी ने बोरे का मुंह खोला और कछुओं को तालाब में छोड़ दिया। तालाब में पहुंचकर कछुओं ने हाथी को बहुत - बहुत धन्यवाद दिया और कहा कि आपने जो हम पर अहसान किया है , इसे हम कभी नहीं भूलेंगे और समय आने पर आपकी मदद जरूर करेंगे। कुछ दिन बीत गए। 

एक दिन हाथी भीषण गर्मी से परेशान हो उसी तालाब में नहाने के लिए पहुंचा । तालाब में उतरकर हाथी नहाने लगा । इतने में हाथी का पैर दलदल में धंस गया। हाथी तालाब से बाहर निकलने के लिए परेशान हो गया। वह एक पैर आगे बढ़ाता तो दूसरा पैर दलदल में धंस जाता। हाथी ' बचाओ - बचाओ ' चिल्लाने लगा। 

हाथी की आवाज सुनकर तालाब में रहने वाले सारे कछुए पानी से बाहर आकर हाथी से पूछने लगे - हाथी भैया , हाथी भैया आप इतना क्यों चिल्ला रहे हो ? हाथी बोला - भाइयो ! मैं तालाब के दलदल में धंस गया हूं , मुझे किसी तरह तुम सब बाहर निकालो , वरना मैं दलदल में फंसकर मर जाऊंगा। हाथी की बात सुनकर कछुए बोले- हम सब अभी मिलकर दलदल को हटा देते हैं।

 फिर आप हमारी पीठ पर पैर रखकर तालाब से बाहर निकल जाइएगा। देखते ही देखते सारे कछुओं ने मिलकर दलदल को हाथी के पैरों के नीचे से हटा दिया और खुद लाइन से बैठ गए। उनमें से एक ने कहा , हाथी भैया अब आप हमारी पीठ पर पैर रखकर तालाब से बाहर निकल जाइए। हाथी ने वैसा ही किया । इस तरह हाथी बाहर आ गया। उसने कछुओं को धन्यवाद देते हुए कहा - भाइयो ! आप सबने मुझे तालाब से निकाला , मैं इसे जीवनभर याद रखूगा। यह कहकर वह जंगल में चला गया।




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Kahani - 2

लपकू बंदर आज घूमते - फिरते शहर की ओर चला आया। बाजार में गया तो देखा लोग इधर - उधर जा रहे हैं। भीड़ भी बहुत है। वो थककर एक पेड़ पर बैठ गया और कुछ खाने - पीने के बारे में सोचने लगा।  सामने ही एक मंदिर था।

लोग मंदिर के बाहर खाने की चीजें बांट रहे थे। वो भी बचते - बचाते वहां जाकर चुपचाप बैठ गया।  कुछ लोगों ने उसे खाने को दिया। पेट तो भर गया, लेकिन उसे एक बात समझ में नहीं आई कि हर कोई एक हाथ से काम कर रहा है और दूसरा हाथ कान में लगाकर अपने आप से ही बातें कर रहा है कभी जोर - जोर से हंसने लगता है। 

सोचते - सोचते वो पास ही के नीम के पेड़ पर जाकर बैठ गया। थोड़ी ही देर में वहां चार लोग आए और पेड़ की छाया में बैठकर मोबाइल के बटन दबाते और कान में लगाकर बतियाते। सारी हरकतें देखकर लपकू को खुराफात सूझी । वह नीचे लपका और एक के हाथ से मोबाइल छीनकर भाग गया। अचानक ये देखकर सब हैरान हो गए और उसके पीछे - पीछे भागने लगे, पर वो हाथ आने वाला नहीं था।

लपकू तो छलांगे भरता हुआ सीधे उस जगह पहुंचा, जहां उसके सारे साथी बैठे हुए थे। चुपचाप एक पेड़ पर बैठकर मोबाइल को हिलाने - डुलाने लगा। कुछ समझ नहीं आ रहा था । उलटने - पलटने के चक्कर में थोड़ी देर में ही अचानक कोई बटन दबा और जोर - जोर से गाना बजने लगा " दबंग दबंग हुड़ हुइ दबंग दबंग "। अब तो गाना सुनते ही आसपास के सारे बंदर दौड़े आए और उछल - उछल कर नाचने लगे। नजारा देखने लायक था।

एक के बाद एक गाने बजते गए और जश्न मनता रहा। इतनी देर में चार - पांच लोग लपकू को ढूंढते हुए वहां पहुंच गए , लेकिन पास जाने की किसी की हिम्मत नहीं हुई। बस दूर से नजारा देखते रहे । नाचते - नाचते अचानक गाना बंद हो गया तो लपकू फिर उसे हिलाने लगा , पर अब बैट्री खतम हो चुकी थी। परेशान होकर सब साथी अपने - अपने पेड़ों पर उछल - कूद करने लगे।

आज सब बहुत खुश थे थोड़ी देर तक उलटने - पलटने के बाद लपकू बंदर भी परेशान हो गया तो मोबाइल वहीं छोड़कर भाग गया। लोगों की जान में जान आई। मोबाइल भी महंगा वाला था। वे चुपचाप वहां गए , मोबाइल ले आए और राहत की सांस ली।


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