Bacchon ki kahani. Best story. प्रेरणादायक कहानी।

 

Bacchon ki kahani. Best story. प्रेरणादायक कहानी।

Bacchon ki kahani. Best story. प्रेरणादायक कहानी।

Kahani - 1

अदिति अपने माता - पिता की इकलौती संतान थी । वह सातवीं क्लास में पढ़ती थी । उसकी मम्मी हाउसवाइफ थीं और पापा सरकारी स्कूल में टीचर । अदिति पढ़ने में काफी होशियार थी । वह समय की पाबन्द थी और अपने सभी काम बिलकुल समय पर करती थी , किन्तु वैश्विक महामारी कोविड 19 और उसके बाद के लॉकडाउन की परिस्थिति के कारण उसका लाइफ स्टाइल ही बदल गया था । उसके पढ़ने से लेकर खाने - पीने और सोने - उठने का रूटीन भी डिस्टर्ब हो गया था। 


आज सुबह से ही अदिति काफी उदास थी । लॉकडाउन में वह प्रायः 8 बजे से पहले कभी भी सोकर नहीं उठती थी । अभी सुबह के करीब छह बज रहे थे । वह चुपचाप अपने बिस्तर से उठकर बाहर बालकनी में आ गई । कॉलोनी में अभी कोई भी नहीं जगा था । वह अपने घर की एक खिड़की से दूसरी खिड़की और एक दरवाजे से लेकर दूसरे दरवाजे पर खड़ी होकर बाहर देखती जा रही थी । तभी उसकी मम्मी बेड पर अपनी बेटी को अपने पास नहीं पाकर घबराकर बाहर की ओर भागी।


अदिति को इस तरह से अकेले परेशान देखकर उसकी मम्मी चिंतित हो उठीं । मम्मी ने पीछे से ही बहुत हलके से उसके कंधे पर अपना हाथ रखा और धीरे से पूछा , ' बेटी , क्या हुआ तुम्हें ? इतनी सुबह बाहर क्या कर रही हो ? क्या कुछ परेशानी है ? तुमने मुझे जगाया क्यों नहीं ? थोड़ी देर के लिए अदिति कुछ भी नहीं बोली । देखते - देखते उसकी आंखें डबडबा आईं , फिर खुद को संभालते बोली , “ मम्मी मैं क्या करूं , कुछ भी समझ में नहीं आता है।


 घूमने के लिए बाहर गए हुए हमें कितने महीने गुजर गए । दिनभर में मेरी ऑनलाइन क्लास के दो पीरियड होते हैं और फिर मैं बिलकुल खाली हो जाती हूं ... होमवर्क में भी बहुत कुछ करने के लिए नहीं होता है । साथ में खेलने के लिए भी कोई नहीं है । दिन - भर घर में रहते - रहते मैं बहुत बोर हो गई हूं " " बेटी , मैं तुम्हारी समस्या समझ सकती हूं , आखिर संकट की इस घड़ी में हम लोग कर ही क्या सकते हैं ? थोड़ा धैर्य से काम लेना होगा । इस तरह से घबराने से मन और भी विचलित हो जाएगा " , मम्मी ने अपनी लाड़ली बेटी को समझाने की कोशिश की।


 जब अदिति के पापा को अपनी बेटी की उदासी के बारे में पता लगा तो वे भी चिंतित हो उठे । फिर थोड़ी देर बाद वे अपनी बेटी के कमरे में आए , देखा कि वह अपने कंप्यूटर पर कुछ कर रही थी । पापा अदिति के पास ही बैठ गए , फिर बोले " देखो बेटी , आज पूरी दुनिया जिस संकट का सामना कर रही है , वह स्थायी नहीं है , कुछ समय के लिए है । जिस दिन इसकी रोकथाम के लिए वैक्सीन बन जाएगी , यह संकट भी खत्म हो जाएगा।


 दुनिया के कई देश और कंपनियां इस दिशा में तत्परता से कार्य कर रहे हैं और जल्दी ही इसमें सफलता मिलने की उम्मीद है " , पापा ने बड़े प्यार से अपनी बेटी को समझाया । " लेकिन यह तो कोई बात नहीं हुई ... आखिर तब तक मैं क्या करूं पापा ? बहुत बोरिंग लगता है , घर में मेरा मन जरा भी नहीं लगता है ...। " पापा थोड़ी देर के लिए शांत रहे और फिर उसे गले लगाते हुए बोले , “ अब तुमको जरा भी नहीं सोचना है । 


मैं अब अपने स्कूल के काम से फ्री होकर तुम्हारे साथ खेला करूंगा , हम लोगों के साथ तुम्हारी मम्मी भी खेल में भाग लेंगी , फिर देखना तुमको जरा भी बोरियत नहीं होगी " उसी समय पापा ने अदिति के कंप्यूटर में ऑनलाइन गेम्स के साथ साथ लूडो भी डाउनलोड कर दिए । मम्मी - पापा के साथ वह बहुत देर तक कैरम भी खेलने लगी , जिसमें उसे समय के बीतने का जरा भी अहसास नहीं होता था । शाम के समय उसके मम्मी - पापा घर के सामने लॉन में उसके साथ बैडमिंटन खेलने लगे । साथ ही वे खाली समय में घास - फूस और कचरे से भरे अपने किचन गार्डन की साफ - सफाई करने लगे । उन्होंने मौसम के अनुसार सब्जियां भी लगानी शुरू कर दीं।


 सब्जियों की देखभाल का काम सब लोगों के बीच बराबर बांट दिया गया । इन सभी कामों में अदिति को एक अलग तरह की खुशी मिलने लगी थी । वह बागवानी के इन सभी कामों को पहली बार कर रही थी और उसे वक्त का पता ही नहीं चलता था । समय के साथ अदितिको अब अपनी ऑनलाइन क्लासेस में भी मजा आने लगा था । मम्मी - पापा के साथ खेल - कूदकर उसके बोरियत के दिन भी खत्म हो गए थे । अपनी बेटी को खुश देखकर मम्मी पापा की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा।


Kahani - 2


रोशन की मम्मी हमेशा समझाती “ बेटा पढ़ाई में ध्यान लगाओ , हमेशा मोबाइल से चिपके रहते हो " लेकिन रोशन पर कोई असर ही नहीं पड़ता था । हमेशा वादा करता कि अच्छी पढ़ाई करूंगा , लेकिन परिणाम वही ' ढाक के तीन पात ' । परीक्षा से पहले वह बड़ी - बड़ी बातें करता कि इस बार पेपर बहुत अच्छे मम्मी जानती थीं - ' अधजल गगरी छलकत जाय । 


रोशन अपने मम्मी - पापा का नाम रोशन करने की बजाय नाम के विपरीत उनका नाम बदनाम कर रहा था , जैसे ' आंख का अंधा नाम नैनसुख ' । मम्मी कहती - ' अपनी करनी पार उतरनी ' इसलिये पढ़ाई पर ध्यान दो । " मम्मी आप नहीं जानती ! टीचर मुझे जानबूझकर कम नंबर देती हैं , क्योंकि वे मुझे पसंद नहीं करतीं । " " यह क्या बात हुई ' उल्टा चोर कोतवाल को डांटे ? ' तुम ही जरूर कुछ शरारत करते होओगे , ' ताली एक हाथ से नहीं बजती । रोशन को याद आया , कक्षा में सीटी बजाने पर टीचर उससे नाराज थीं और होमवर्क न करने पर हमेशा उसे सजा देती क्योंकि उन्हें पता था , ' लातों के भूत बातों से नहीं मानते ' ।


 रोशन ने दादा जी के आने पर पूरी बात उन्हें बताई । दादाजी ने उसको प्यार से समझाया कि " बेटा मोबाइल ही जीवन नहीं है । इसमें अपना कीमती समय बर्बाद मत करो । तुम्हें पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए । शैतान बच्चों से दोस्ती मत करो , उनसे दोस्ती करो जो होशियार हैं , क्योंकि ' खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है ' । रोशन दादाजी की बात बहुत मानता था । उसने उनसे वादा किया कि आगे से वह पढ़ाई पर ध्यान देगा , अच्छी पढ़ाई करेगा । दादाजी खुश हुए , बोले बेटा " जब जागो तभी सवेरा " । दादाजी की सीख और प्यार उसके लिए ' डूबते को तिनके का सहारा ' बनी । अब उसने ठान लिया कि अच्छे नंबर लाकर दिखाएगा । फिर उसकी ' मेहनत रंग लाई ' और ' यथा नाम तथा गुण ' वाली का कहावत उस पर चरितार्थ हुई।


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