Jadui matke ke kahani. जादुई मटके की कहानी। Hindi kahani. Hindi story.

Jadui matke ke kahani.

Jadui matke ke kahani. जादुई मटके की कहानी। Hindi kahani. Hindi story. Bacchon ki kahani. बच्चों की कहानी। 


 सोनपुर नाम का गांव था। उसमें रामु नाम का एक किसान अपनी पत्नी रेखा के साथ रहता था। वो अपने खेत में खेती कर के अपना जीवन चलता था। उसके पास बैल नहीं था। वो खुद हल चलता था। एक दिन वो खेत मे हल चला रहा था। तभी उसका हल जमीन में किसी चीज से अटक गया था। उसने जैसे तैसे कर के हल को निकाला। रामु ने उस जगह खोदना सुरु किया। जहा हल अटका था। खुदाई करने के बाद उस मे से एक पीतल का बड़ा मटका निकला। और वह मटका खाली था।  उसने मन ही मन सोचा की इस मटके का क्या करना है ? अगर इसमें सोना चांदी होता तो हमारी गरीबी चली जाती।


उसने सोचा कि पित्तल का मटका है तो सोना भी होना चाहिए। मेरे ख्याल से वो अंदर गिर गया हो। उसने पित्तल के मटके को खेत से बहार फेक दिया। और जमीन खोदना सुरू किया। पूरे दिन में पूरा खेत खोद दिया। पर एक भी सोना नहीं मिला। दूसरी साइड खेत के किनारे से मोहन जा रहा था। मगन बहोत गरीब था। गांव में मांग के अपना जीवन गुजरता था। उसने खेत मे फेका हुआ पित्तल का मटका देखा। उसने उस मटके को उठाया और मन ही मन बोलने लगा, वाह क्या बात है ! इस पटके को बेचूंगा तो महीने का राशन आ जायेगा। 


मोहन मटके को लेकर घर आया। मोहन की पत्नी ने कहा यह मटका कहा से लाये। यह मुझे खेत मे पड़ा मिला था। इसे अच्छे से साफ कर के रख दे। में सुबह इसे बेच के पैसे ले आऊंगा। उस मटके को एक कोने में रखा। एक थैले में थोड़े ही चावल थे। उस चावल को चूहे ना खा जाए इस लिए उस चावल को उस पित्तल के मटके में रखा। रामु खेत को खोदना चालू रखा था। धीरे धीरे अंधेरा होने लगा। रामु ने कहा, आज तो कुछ नहीं मिला। अब कल आके थोड़ा और गहरा खोद के देखेंगे। वो अपने घर चला जाता है। 


यह part - 1 है। 

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