Hindi story. Hindi kahani. सब कुछ पैसों से नहीं खरीदा जा सकता।

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Hindi story. Hindi kahani. सब कुछ पैसों से नहीं खरीदा जा सकता। Motivational story.

 सोनपुर नाम का गांव था। गांव में रामुलाल नाम का वेपरी था। उसका एक लड़का भी था। जिसका नाम बबलु था।  रामुलाल की पत्नी को अपने बेटे बबलु को बहोत चाहती थी। रामुलाल के पास के ही मोहनलाल रहता था। सरकारी ऑफिस में अच्छे पोस्ट पर थे। मोहनलाल का लड़का तरुण बबलु का बहोत ही अच्छा दोस्त था। मोहनलाल के घर मे पैसों की कमी नहीं थी, उसके पास बहोत पैसा था। रामुलाल ले घर मे पैसों की कमी नहीं थी। पर रामुलाल बेकार की फालतू में कोई खर्च नहीं करता। रामुलाल की पत्नी अपने पति को कंजुस कहती। वो कहती कि थोड़ा खर्चा तो शौक लिए होना चाहिए। 

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रामुलाल कहते हम भी तो शोक करते है। अब रोज रोज शौक नहीं करना चाहिएं रामुलाल की पत्नी कहती मोहनलाल की पत्नी के शरीर पे कितने गहने है। रामुलाल ने कहा उसके पास सोना है पर संस्कार नहीं। और तुम्हारे पास जरूरी गहने भी है और उच्च संस्कार भी। आपकी बात सही है। पर उच्च संस्कार किसे दिखता है। और गहने सभी को दिखता है। रामुलाल ने कहा कि दूसरों को दिखाने के लिए जीवन जिये तो पूरी जिंदगी बस खाली दिखावे में चला जाएगा, और फिर बचेगा क्या। तेरे पास जो है उसी में संतोष रख। आभूषण तो कोई भी खरीद के ला सकता है। पर संस्कार तो वर्षो की महेनत से विकसित होती है। वो पैसे खर्च करने से नहीं मिलती। रामुलाल की पत्नी चुप हो गई। 


बबलु और तरुण दोनों गांव के स्कूल में पढ़ते थे। दोनों तीसरी क्लास में थे। बबलु पढ़ने में बहोत होशियार था। और तरुण को पास होने लायक भी मार्क नहीं आते। एक दिन बबलु ने आपने घर आकर आपने पापा से कहा, क्या मुझे एक स्कूल बेग ला दोगे। रामुलाल ने कहा तरुण तुम्हारे साथ पड़ता है। और तू पढ़ने में जितना होशियार है वो नहीं है। तू हर बार स्कूल में पहले नम्बर से पास होता है। और तुम्हारे स्कूल में सभी बच्चे और टीचर तुम्हे मान देते है। और तरुण को नहीं देते। और तरुण लोगो का ध्यान घिचने के लिए वो महंगे महंगे चीजे लाकर लोगो को बताता है। पर में तुम्हे महंगे बेग लाकर नहीं दे सकता। ऐसी कोई बात नहीं है कि मेरे पास पैसे नहीं है। में तुम्हे महंगे बेग लाकर दूंगा तो तू स्कूल में सबको बेग बताता रहेगा, और पढ़ाई में ध्यान घिरे घिरे कम हो जाएगा। इस लिए में तुम्हे महंगे बेग लाकर नहीं दे सकता। 

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बबलु गुस्सा होकर कहा ! क्या पापा आप भी एक बैग के लिए इतना बात कह दिया। फर रामुलाल ने कहा में तुम्हारी  भलाई के लिए कह रहा हु। अगर में तुम्हे महंगे बेग लाकर दूंगा तो तेरा पढ़ाई में ध्यान कम और महंगे चीजों में इंटरस्ट बढ़ जाएगा। फिर भी उसका बेटा नहीं माना। वो जिद्द करने लगा। रामुलाल ने कहा ठीक है में तुम्हे महंगे बेग लेकर दे देता हूं। और अगली बार जब तुम्हारा एग्जाम होगा तब तुम्हारा मार्क्स देखेंगे। एग्जाम खत्म हुआ और रिजल्ट आया। फिर रामुलाल ने बबलु को कहा बेटा कैसा आया रिजल्ट। बबलु ने कहा तीसरा नम्बर आया। बबलु रोने लगा। और अपने पापा से कहा आन के बाद कभी भी महंगे चींजे लेने ले लिए नहीं कहूंगा। 

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