बिना सोचे समझे लिया हुआ निर्णय से किसी का भला नहीं होता। Hindi story. Hindi kahani.

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 गरुड़ ( Eagle ) बहोत सालों से पक्षियों का राजा था। पक्षियों का राजा होने के वावजूद भी वो अन्य पक्षियों की समस्या पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाता था। इस लिए सभी पक्षियों ने सोचा कि अब हमें एक नया राजा चुनना चाहिए।  एक दिन सभी पक्षी ने मीटिंग रखी। उसमे हंस, तोता, मोर , कोयल, उल्लू , कबूतर , गीध ओर अन्य कुछ पक्षी भी थे। 

मीटिंग में सभी ने हंस का नाम लिया, तो कुछ ने तोते का नाम लिया, तो किसीने गीध का नाम लिया। आखिर उन सबकी नजर नुकेले नाखून वाले और प्रभावशाली चहेरे वाले उल्लू पर गई। सब को लगा कि होशियार उल्लू ही अबसे अच्छा राजा बनने जे लायक है। सभी ने उल्लू को राजा बनाने का निर्णय लिया। तुरंत उल्लू की राज्यभिषेक की तैयारियां सुरु की। मंडप बनाया गया, और उसे सजाया। सिहासन लाया गया और उसे अच्छे से सजाया गया। राज्यभिषेक की घड़ी आई। उल्लू तैयार होकर मंडप में आया। उल्लू मंडप पर बैठने जा ही रहा था कि, तभी वहां एक कौआ उड़ता हुआ आया।

मंडप में इतने सारे पक्षियों को देख उसने पूछा, यह सब क्या है ? किसकी तैयारी चल रही है। पक्षियों ने कहा मह सब ने उल्लू को राजा बनाया है। यह उसका राज्यभिषेक हो रहा है। कौआ हसने लगा, उसने कहा हंस, तोता, मोर, बुलबुल, कोयल, सारस यह सब को छोड़ कर तुम सब उल्लू को अपना राजा बनाने के लिए तैयार हुए हो। इतने सारे सुंदर और होशियार पक्षी है, पर उल्लू में ऐसी क्या बात है, वो नही तो होशियार है नहीं सुंदर। जो दिन को देख नहीं सकता वो लोग का क्या कल्याण करेगा। 

इस से अच्छा तो गरुड़ राज क्या गलत है। वो भले हमसे दूर हो, पर उसके नाम से ही शत्रु डर जाते है। उसे हटाकर दूसरे को राजा बनाना ही नहीं चाहिए। कौए की बात सुनकर सब चुप हो गए। उसे कौए की बात सही लगी। गरुड़ राजा तो था ही, इस लिए उसने उल्लू को राजा बनाना योग्य नहीं समझा। इस लिए सभी पक्षी सभा छोड़ के चले गए। अंधे उल्लू को यह सब  का पता नहीं चला। उसने गुस्से से पूछा राज्यभिषेक क्यों अटका हुआ है ? 

उल्लू की रानी ने कहा, आपके राज्यभिषेक में कौए ने विघ्न लिया है। अभी उसके राज्यभिषेक में उसके अलावा कोई नहीं है। सभी पक्षी मंडप छोड़कर चेल गए। उल्लू के हाथ मे आया हुआ निवाला छीन गया। इस लुए वो गुस्से से लाल, पिला हो गया था। उसने कौए से कहा। तूने आकर मेरे राज्यभिषेक में विघ्न डाला है , में तुम्हे देख लूंगा। उस दिन से उल्लू ओर कौए में नफरत हुए। 

सिख:- बिना सोचे समझे लिया हुआ निर्णय से किसी का भला नहीं होता।

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