आलस को दूर कैसे करे ? कहानी के साथ समझे। Best story. Lazyness

आलस को दूर कैसे करे ? कहानी के साथ समझे।  Laziness.

आलस को दूर कैसे करे ? कहानी के साथ समझे। Hindi kahani. यह कहानी एक गुरुुजी और शिष्य की है। Motivational story. Lazyness
 

यह कहानी है एक गुरुजी और एक शिष्य की। शिष्य अपने गुरु का बहोत सम्मान और गुरु का आज्ञा का पालन करता था। गुरुजी को भी इस शिष्य से बहोत स्नेह था, पर शिष्य बहोत आलसी था। गुरुजी शिष्य को जो अध्यय देते वो आलस बहोत करता था। वो सध्यय के डर से इधर उधर भागता फिरता। वो काम को कल के ऊपर छोड़ देता था। गुरुजी को थोड़ा चिंता लगी रहती थी कि उसका शिष्य जीवन मे कहि असफल ना हो जाये। आलस व्यक्ति को मानसिक रूप से कमजोर कर देती है। ऐसे लोग जल्दी कोई भी निर्णय नहीं ले सकते, अगर निर्णय ले भी ले तो उसे सही तरीके से काम को पूरा नहीं कर पाता।

उसके अपने उस शिष्य के लिए एक उपाय सोचा। एक दिन गुरुजी ने अपने शिष्य को एक लाल पत्थर दिया, और उसे कहा में दो  दिन के लिए दूर गांव जा रहा हु। और जो पत्थर मेने तुम्हे दिया है यह एक जादुई पत्थर है। इस पत्थर को जिस वस्तु को स्पर्श कराओगे वह सोना बन जायेगा। जिस दिन में वापस आऊंगा उस दिन में यह पत्थर ले लूंगा।  शिष्य यह सुनकर बहोत खुश हुआ। एक दिन तो सिर्फ उसने खाली सोचने में व्यर्थ कर दिया कि मेरे पास अगर ढेर सारा सोना आ जायेगा तो वो बहोत अमीर आदमी बन जायेगा। उसके पास बहोत कुछ होगा। कोई भी काम मुझे नहीं करना होगा। सब काम मेरे नोकर कर देंगे।

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दूसरे दिन जब वह उठा तो उसने कहा कि यह आखरी दिन है। उसने सोच लिया जी उस पत्थर का उपयोग आज जरूर करेगा। उसने सोचा कि वह बाजर से लोहे के सामान खरीद के लायेगा और उसे सोना बना देगा। समय विवता गया उसने सोचा कि बहोत तो बहोत वक़्त है। उसने सोचा कि दोपहर का खाना खाने के बाद जाऊंगा। पर खाना खाने के बाद उसे आराम करने की आदत थी। वह थोड़ी देर के लिए सो गया। पर उसका आलस गहरे नींद में खो गया। वह जब उठा तो सूरज ढलको था। वह तुरंत बाजार की तरफ दौड़ने लगा। पर उसे रास्ते मे ही गुरुजी मिल गए। वह उसके पैरों में गिर गए। शिष्य ने कहा, गुरुजी क्या में इस पत्थर को एक दिन के लिए और रख सकता हु।

पर गुरुजी ने इनकार कर दिया। शिष्य ने जो सपना देखा था वह खत्म हो गया। इस घटना से शिष्य को एक बड़ी शिख मिली। उसे अपने आलस पर पछतावा हुआ। उसे समझ आ गया कि आलस एक शाप है। उसने गुरुजी से वादा किया कि वह कभी भी काम चोरी नहीं करेगा। और जो काम मिलेगा वह ध्यान से और मन से करेगा।

सिख:- आलस एक ऐसी चीज से जिसे आप अपने मन मे लेकर चलोगे तो आप जीवन मे कुछ नहीं कर पाओगे। शिष्य के जैसे, शिष्य अगर अगर चाहता तो सबसे धनिक व्यक्ति बन सकता था। पर उसके आलस से उसे कुछ नहीं करने दिया। अवसर तो ढेरों मिलते पर लोग उसे कल के ऊपर ऊपर छोड़ देते है। " कल करेंगे। " इस वर्ड को अपने मन से निकाल दो, की कल करेंगे। क्यों वो आज नहीं हो सकता। जितना हो शके उतना आज ही अभी करने का प्रयास करो। कल किसने देखा।

अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो तो अपने दोस्तों को जरूर शेर कर। खास उन्हें जो आलस करते है। पढ़ने के लिए और शेर करने के लिए आपका धन्यवाद।


आलस को दूर कैसे करे ? कहानी के साथ समझे। Hindi kahani. यह कहानी एक गुरुुजी और शिष्य की है। Motivational story.


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