Akbar or birbal ki kahani. अकबर और बीरबल की कहानी। Hindi kahani.

 

अकबर और बीरबल की कहानी। hindi kahani. Hindi story.

Akbar or birbal ki kahani. अकबर और बीरबल की कहानी। Hindi kahani. Hindi story.

एक दिन अकबर ओर बीरबल शिकार करने के लिए जंगल मे जाते है। अकबर जब जंगल में चल रहे होते है तब उसके पैर में खरोच आ जाती है। ओर खून बहने लगता है। अकबर बीरबल से कहता है, बीरबल! बिरबल ! मेरे पैर से खून बह रहा है इसका जल्दी से इलाज करो।  बिरबल  कहता है महाराज जो हुया अच्छे के लिए हुया। अकबर बीरबल पे गुस्सा होकर कहता है, तुम्हे पता है तुम क्या कह रहे हो। मेरे पैर से खून बह रहा है और तुम्हे मजाक लग रहा है। 

अकबर को बीरबल पर बहोत गुस्सा आता है और  अपने सिपाहियों को कहता है! सिपाहियों बीरबल को ले जाओ और शुभ समय देख कर  इसे फांसी पे चढ़ा दो। बीरबल को वहाँ से लेके चला जाता है। 

अकबर जब अकेले शिकार करने के लिए आगे बढ़ता है तब उसे कुछ आदिवासी पकड़ के ले जाते है। आदिवासी अकबर को बलि चढ़ाने के लिए तैयार करता है। तभी एक आदिवासी की नजर उसके पैर पर जाती है। पैर से खून गिरते देख आदिवासी लोग कहता है, यह अशुभ है! इसे छोड़ दो। अकबर को छोड़ देता है। तभी उसे बीरबल की याद आती है। उसने सही कहा था। अकबर दौड़ते हुए बिरबल के पास जाता है। और मन मे यही प्राथना करता है कि बिरबल को फाँसी ना दी हो। बीरबल को फाँसी देने वाला ही होता है तभी अकबर वहां पे पहोच जाता है। अकबर बीरबल से कहता है तुमने सही कहा था। जो होता है अच्छे के लिए होता है। अकबर वहां की सारी बात बताता है। मेने तुम्हे वहां से भगा के अच्छा नही किया। मुझे माफ़ कर देना। बीरबल कहता है जो हुया अच्छे के लिए हुया। अकबर कहता है ऐसा क्यों बोल रहे हो। बीरबल कहता है अगर में वहां होता तो वो लोग मुझे बलि पर चढ़ा देते।

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अकबर बीरबल की हिंदी कहानी। 


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