Motivational story in hindi. Motivational hindi story. Hindi kahani.

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 ये कहानी है राकेश की। राकेश बहोत ही हुनहार लड़का था। और नोकरी के इंटरव्यू के लिए पहोंचा था। सारे राउंड पूरा कर के आज आखरी राउंड था कंपनी के डायरेक्टर के साथ। डायरेक्टर को ही तय करना था कि नोकरी किसे मिलने वाली है। मतलब नोकरी राकेश को मिलने वाली है या नहीं इसका फैसला डायरेक्टर साहब के जरिये बस होने ही वाला था। इंटरव्यू में उससे कुछ सवाल पूछे गए। उसके मार्कसीट और सर्टिफिकेट को देखते हुए डायरेक्टर ने कहा तुम एक्स्ट्रा एक्टिविटी में भी बहोत अच्छे थे। उसने गर्व से हा में जवाब दिया। डायरेक्टर ने पूछा कि पढ़ाई के दौरान कोई स्कोलरशिप मिली थी। 

तो राकेश ने कहा नही। तो बोला अच्छा मतलब तुम्हारे पढ़ाई का खर्चा तुम्हारे पिताजी उठाया करते थे। उसने कहा हा बिल्कुल। मेरे पिताजीने पढ़ाई का पूरा खर्च उठाया है। तब डायरेक्टर ने पूछा कि क्या करते है तुम्हारे पिताजी। राकेश ने कहा कि मेरे पिताजी दूसरों के कपड़े धोते है। डायरेक्टर एक दम शांत हो गए। उसने कहा कि अपने हाथ तो दिखाओ। उसने हाथ आगे करे। तो देखा कि हाथ तो बहोत नरम है और मुलायम है। डायरेक्टर ने उस से कुछ और बोले बिना कहा की ठीक है एक काम करो कल तुमसे फिर मिलना चाहूंगा। 

लेकिन आज घर जाकर एक करोगे जो में तुम्हे कहूँगा। उसने कहा बिल्कुल! ( दुबारा बुला रहे है इसका मतलब नोकरी पक्की है। ) हां, जो आप बोलेंगे वो में करूँगा। तो डायरेक्टर ने कहा घर जाना और घर जाकर अपने हाथों से अपने पिताजी के हाथ धुलवाना। इसे थोड़ा अजीब लगा। ठीक है कंपनी के डायरेक्टर है जो बोलेंगे कर लेंगे। राकेश बहोत खुशी खुशी घर गया। पिताजी का इंतेजार कर रहा था। उत्साह से सारी बात पिताजीको बताई उसके बाद पिताजी से कहा कि पिताजी आप अपने हाथ मुझे दीजिये। पिताजीको थोड़ा अजीब लगा। बोले क्यों? नहीं नहीं बस अपने हाथ मुझे दीजिये। जैसे उसने अपने पिताजीके हाथ अपने मुलायम हाथो में लिए तो पिताजीके हाथ तो बहोत कड़क, खुरदुरे , ऊबड़खाबड़, कटे फ़टे ऐसे पिताजीके हाथ थे।

Motivational hindi kahani

पिताजी के हाथ देखते ही इसे थोड़ा अजीब लगा। उसके बाद अपने पिताजी को हाथ दिलवाने के लिए  ले गया। जब उनके कटे फटे हाथों पर पानी पड़ रहा था उसकी जो दर्द थी वह पिताजी के चेहरे पर साफ नजर आ रहा था। और हाथ धुलाते धुलाते राकेश की आंखों से पानी बहने लगा। पिताजी के आंखें भी नम हो गई क्योंकि वह भी समझ रहे थे की बेटा मेरे दर्द को महसूस कर रहा है। उस दर्द का जो पिताजी ने राकेश से वर्षों से छुपा कर रखा था दबा के रखा था। और राकेश को बस अच्छी परवरिश दिए जा रहे थे। उसके बाद राकेश कुछ नहीं बोला। उससे रहा नहीं गया उसने सारे कपड़े जितने बचे हुए थे धोने के लिए। वो सारे कपड़े धोये और पिताजी को कुछ नहीं करने दिया। पिताजीने बहोत रोका लेकिन आज राकेश ने पिताजीकी बात नहीं सुनी। हमेशा से पिताजीने राकेश को काम नहीं करने दिया था। लेकिन आज राकेश उनकी बात नहीं मान सका। उसने सारे कपड़े धोये। और अपने हाथों से पिताजीको को खाना भी खिलाया। 

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अगले दिन जब दुबारा डायरेक्टर के पास इंटरव्यू के लिए पहोंचा। तब डायरेक्टर ने पूछा कैसा रहा कल का दिन। क्या अपना अनुभव मेरे साथ शेर करोगे। आंखों में नमी लेकर इसने बोला कि कल का दिन मेरे लिए ऐसा दिन था जो मेरे जीवन मे कभी नही जिया था इस से पहले। बहोत सारी चीजें सिंखि मेने। में हमेशा से कद्र तो करता था जो मेरे पिताजीने मेरे लिए किया। मुझे पढ़ाया लिखाया अच्छे कपड़े खाना सबकुछ दिया। लेकिन कल दिल से कद्र कर पाया उनकी महेनत ओर कष्ट की। साथ ही साथ वो काम किया करते थे मुझे पता था कि कठिन है लेकिन कल खुद कर के पता चला कि वाकई कितना कठिन है कितना कष्ट है इस काम मे। और तो और रिश्तों की अहमियत कल मेने जितना महसूस किया। वैसी कभी नहीं महसूस की थी। डायरेक्टर ने कहा बस मुझे यही खूबियां चाहिए थी मेरे मैनेजर में। ऐसा मैनेजर चाहियें था जो अपनों से नीचे वालो से काम करवाये तो उनके कष्ट को महसूस कर पाए समझ पाए और उनसे एक Buisness का व्यवहार ना रखे बल्कि आत्मीयता रख पाए उनकी मेहनत का कदर कर पाए। उनको समझ पाए उनको सराहना कर पाए। तुम इस नोकरी के लिए परफेक्ट हो फिट हो ये रहा तुम्हारा ऑफर लेटर। 

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