कई बार हम जितना सोचते है उस से ज्यादा हो जाता है। सफलता Motivational story in Hindi.

 

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कई बार हम जितना सोचते है उस से ज्यादा हो जाता है। सफलता Motivational story in Hindi.


होटल में एक व्यक्ति रोज फिक्स टाइम पर चाय पीने के लिए जाया करते थे मिस्टर शर्मा। आज भी मिस्टर शर्मा वही चाय पी रहे हैं। लेकिन आज उनके सामने जो दृश्य था वह थोड़ा अलग था। जो उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था। सामने वाली टेबल पर देखते हैं कि एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति अपनी छोटी 8 - 10 साल की बच्ची के साथ वहां पर आता है। वह जो व्यक्ति था उसके कपड़े फटे हुए और मेले थे और शर्ट के ऊपर के दो बटन गायब थे बिल्कुल देख कर लग रहा था की कोई मजदूर है जो मजदूरी का काम करता है। लेकिन जो साथ में बच्ची को लाया था स्नेह और प्यार से उसने धुली हुई साफ नई फ्रॉक पहनी हुई थी। बाल अच्छे से बंधे हुए थे। बहुत खुशी से दोनों बैठे, वेटर आया दोनों के लिए पानी लाया और पूछा कि क्या लाऊं। तो उसने बोला डोसा ले आओ इसके लिए मेरे बच्ची के लिए। वेटर ने पूछा और तुम्हारे लिए तो बोला नहीं मेरे लिए कुछ नहीं। और बड़े प्यार से दोनों बैठे थे। 

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पिता अपनी बेटी को देखकर बहुत खुश हो रहा था। और पास में बैठे शर्मा जी यह सब देख रहे थे। इतने में थोड़ी देर में उस व्यक्ति का फोन बचता है पुराना छोटा सा फोन। फोन उठाता है अपने दोस्त को बड़े उत्साह से बता रहा था अरे होटल आया हूं बिटिया को लेकर। आज ईसका जन्मदिन  है ना। और मैंने इससे वादा भी किया था अगर तुम क्लास में फर्स्ट आओगी तो मैं होटल में ले जाकर डोसा खिलाऊंगा। तो बस होटल आया उसको डोसा खिलाने। फिर उसका दोस्त कहता है हम दोनों। फिर वो व्यक्ति कहता है नहीं नहीं हम दोनों थोड़ी डोसा खा सकते है। हमारे पास कहा इतने पैसे है। मेरे लिए तो घर पर दाल चावल बनाया हुआ है में जाकर वही खाऊंगा। बिटिया को यहां पर लेके आया हु। ओर फोन रख देता है। यह सुनकर शर्माजी बड़े मायूस हो जाते है। उसके मन मे एक ख्याल आता है व्यक्ति चाहे गरीब हो या अमीर अपने बच्चों के चहेरे पे मुस्कान देखने के लिए वो कुछ भी कर सकता है। और वही ये व्यक्ति कर रहा था। शर्मा जी अपने चाय के पैसे देने काउन्टर पर जाते है तो दो डोसे के भी पैसे देते है। और होटल के मैनेजर से कहते है उस व्यक्ति के लिए एक डोसा और ले जाओ और दोनों डोसा का बिल मेरी तरफ से। यह बताना मत की यह हम मुफ्त में दे रहे है। कि उन्हें कहना कि बिटिया के प्रथम आने पर उसके जन्मदिन पर होटल की तरफ से उसके लिये इनाम है। और बिटिया को आशीर्वाद देना की आगे और अच्छा पढ़े। 


होटल का मैनेजर ये जब सुनता है तो शर्माजी को धन्यवाद देता है औऱ कहता है कि धन्यवाद की हमे इस बारेमे बताने के लिये। ये पुण्य करने का मौका हमे दीजिये। आज वो पिता और बेटी हमारी होटल के महेमान है। बेटर जब दूसरा डोसा लेकर पहुचता है और साथ मे मैनेजर भी जाता है तो यह आदमी घबरा जाता है। नहीं नहीं हमने दो डोसे ऑर्डर नहीं करे थे मेने एक ही डोसा ऑर्डर करा था। तो बोलते है नहीं ये सब हमारी तरफ से है बिटिया प्रथम आई है उसके इनाम के रूप में। ये बहोत खुश होता है और कहता है देखो, अच्छा पढ़ोगी तो कितना कुछ मिलता है। फिर कहता है क्या तुम इसे बांधकर दे सकते हो घर जाकर पत्नी के साथ आधा आधा खायेंगे। उसका मैनेजर कहता है बिल्कुल चिंता मत कीजिये ये आप यही खा लीजिये घर के लिये 3 ओर डोसा और साथ मे मिठाई के डब्बे बांध दिए है। घर जाकर बिटिया का जन्मदिन धूमधाम से मनाइयेगा। मिठाइयां इतनी है कि सारे पढोशिओ को भी खिलायेगा। यह सब कुछ शर्मा जी बाहर खड़े होकर देख रहे थे। और बहोत प्रशन्न हो रहे थे। क्योंकि उसके मन मे एक अच्छा विचार आया किसी की भलाई करने की सोच आई। और उसका परिणाम देखिए उसके सामने वाले ने उसके सोच से भी ज्यादा कर दिया। अगर हम बोलते है ना कि आसपास  अच्छाई खत्म हो रही है कहीं ना कहीं यह हमारी गलत विचार है। 


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