लोग आपके बारेमें क्या सोचते है उनपे ध्यान मत दीजिए। सफलता Motivational story in Hindi.

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ये कहानी है एक किशान की। जिसका नाम था किशन। बहोत मेहनती था बहोत ईमानदार था। इसलिए उसकी हर कोई तारीफ भी करता था। एक दिन किशन जब खेत से घर के लिये निकल रहा था शाम हो चुकी थी। उसने देखा कि चार लोग उसके बारेमे बात कर रहे थे उसने अपना नाम सुना। तो चुप चाप अंधेरे का फायदा उठाकर उसके पीछे पीछे चलने लगा अपनी तारीफ सुनने के लिये। लेकिन उसने कान लगा के उसने सुना तो ये क्या वो लोग तारीफ नहीं उसकी बुराई कर रहे थे। कोई कह रहा था कि किशन बड़ा घमंडी है, कोई कह रहा था कि वो अच्छा होने का दिखावा कर रहा है वगेरा वगेरा। यह सुनकर उसे बहोत दुख हुआ। स्वभाविक बात है किसी को भी दुख हो सकता है।


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 किशन पर खास कर के बुरा प्रभाव इसलिए पड़ा क्योंकि वो सोच भी नही सकता था पूरे गाँव मे कोई उसकी जरासा भी बुराई करता होगा। वो बड़ा उदास रहने लगा। उसे सभी को बाते करते देख उसे यही लगता था कि ये मेरी बुराई कर रहै है। और इस वजह से उसका व्यवहार बदलने लगा। उसके बदलते हुए व्यवहार को देख कर उसकी पत्नी भी परेशान सी होने लगी। एक दिन उसने पूछ ही लिया। क्या हो गया है आपको। क्यो आप इतने परेशान से रहते हो। आप उतना Positive नहीं रहते जितना पहले रहते थे। उस दिन किशन ने पत्नी को सारी बात बताई। तो पत्नी ने समझाया। अपने गांव में एक जाने माने सन्त है आप उनसे मिलिए। उनसे बात कीजिये। आपको अच्छा लगेगा। किशन उस सन्त के पास गया। अपनी परेशानी बताई पूरी व्यथा सुनाई। तब सन्त ने तुरंत जवाब देने के बजाय उसने कहा कि आप आज रात यहीं रुक जाओ। वो रुका! उसका जो घर था वो तालाब के किनारे था। जब वो सोने की कोशिश कर रहे थे तो मेंढ़क की तरररर तरररर तरररर आवाज सुनाई देने लगी। तो किशन ने कहा कि साधुजी ये क्या है। इतने मेंढ़कों की आवाज यहाँ क्यों आ रही है। साधु ने कहा बेटा यहां ऐसा ही, पीछे तलाब है वहा मेंढक रोज तरररर तरररर आवाज करते है। इतनी आवाज आ रही है कि लगता है हजारो मेंढक होंगे। तो उन्होंने कहा कि बिल्कुल सही बेटा। ऐसा करो कि तुम मेरी कुछ मदद कर सकते हो तो करो। उसने कहा ठीक है , यहां बहोत सारे मेंढक है तो में कल 50 से 60 लोग लेके आऊंगा ओर इनको तालाब से भगा देंगे बाहर निकाल देंगे।


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 अगले गईं किशन ने यहीं किया। 50 से 60 लोगो को लेकर आ गया। बस आज तालाब से खाली करना है मेंढ़कों को। बड़ा सा जाल डाला और जब निकाल तो मुस्किल से 40 से 50 मेंढक निकले। देखा और सन्त जी से कहा कि ये क्या रात में तो हजरों मेंढक थे अभी 40- 50 कैसे हो गए। तो उन्होंने कहा कि कोई हजारों मेंढक नहीं थे। बस यही थे। इतने ही मेंढक इतने आवाज कर रहै थे कि तुम्हें लग रहा था को हजारो मेंढक तरररर तरररर कर रहे थे। और तुम्हारे साथ भी ऐसा हुआ है। कोई चार लोगोने तुम्हारे बारेमे बुरा कह दिया तो तुम्हें लग रहा है कि हजारो लोग तुम्हारे बारेमे बुरा कह रहे है। और तुमने तुरंत इन सब को ग़लत नजरिये से देखने लगे। 


सिख-

इस कहानी से हमे यह सिख मिलती है कि कुछ लोगो के बुरा कह देने से हम बुरा नहीं बन जाते। उसे क्या पता कि तुम कैसे हो और तुम्हारे विचार कैसे है। उनसे बेहतर तुम खुद अपने आप को जानते हो। और लोगो का क्या कुछ लोग तो ऐसे होंगे जो अच्छे इंसान की भी बुराई करते होंगे। उसे दिल पर मत लो। ऐसा बर्ताव करो कि तुमने कुछ सुना ही नहीं। 


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